24 October 2020

भाजपा के आईटी सेल बन चुके झामुमो मुक्त झारखंड की मांग करने वाले जनसंवाद181 के कर्मचारी अब हेमंत सरकार का ठकठका रहे दरवाजा

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लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव 2019 के दौरान जनसंवाद केंद्र के कर्मियों ने किया था भाजपा आईटी सेल का काम ट्वीट से हो रहा प्रमाणित
रांची : मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के बंद होने की सूचना के बाद सूचना भवन से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक अफ़रा-तफ़री का माहौल बना हुआ है। दरअसल मामला यह है कि रघुवर दास ने अपने कार्यकाल में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के तहत मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र का संचालन शुरू कराया था। जिसके उपरांत निविदा के आधार पर मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के संचालन की जिम्मेदारी माइका एजुकेशन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को दी गई। लेकिन जनसंवाद केन्द्र के कर्मचारी आंतरिक रूप से भाजपा के पक्षधर बन ग‌ए। जिसका फल हुआ कि वे लोकसभा चुनाव के दौरान ट्विटर के माध्यम से #jmmmuktjharkhand  की नारेबाजी करने लगे, जो कि जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत कर्मचारी कुमारी स्नेहा के ट्वीट से स्वतः स्पष्ट है।

जनसंवाद केन्द्र में ही कार्यरत प्रेमा कुजूर के ट्वीट से स्पष्ट है कि लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान उन्होंने भी कांग्रेस पर हमला बोला है। इस मामले में जनसंवाद के युवा कर्मचारी ऋषिकेश तिवारी ने भी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला था।



अब मामला ये बनता है कि जब जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत तमाम कर्मचारी भाजपा समर्थक हैं, तो फिर झारखंड के गठबंधन की सरकार या फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इनके बारे में क्यों सोचें। फिर बार-बार ये कर्मचारी आखिर मुख्यमंत्री आवास का चक्कर क्यों लगा रहे हैं।
माइका ने कर्मचारियों के साथ किया गलत

माइका के संचालक से कुछ दिन पूर्व समृद्ध झारखंड के कर्मचारी की बात हुई थी। उनका कहना था कि जनवरी के बाद उन्हें विभाग से फंडिंग नहीं हुई थी। लेकिन समृद्ध झारखंड ने प्रमाण के साथ पूर्व में ही खबर लगायी थी कि कंपनी को वित्तीय वर्ष 2019-20 की पूर्ण राशि सात करोड़ पचहत्तर लाख रुपए का भुगतान 04 मार्च 2020 को किया जा चुका है। लेकिन विश्वसनीय सूत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत शनिवार को हुए बैठक में भी उन्होंने जनवरी 2020 के बाद विभाग से आवंटन मिलने की बात पर साफ इनकार किया है। जबकि उन्होंने पूर्व में कर्मचारियों से कहा था कि उन्हें विभाग से जिस माह तक की राशि प्राप्त होगी, उससे तीन माह आगे तक के वेतन का भुगतान करने के लिए वे संकटकाल में तैयार हैं। जिसके मुताबिक कंपनी को जून 2020 तक के वेतन का भुगतान ससमय किया जाना चाहिए था।

माइका के संचालक ने प्रोजेक्ट बंद करने की लगाई थी गुहार

समृद्ध झारखंड से हुई बातचीत के क्रम में माइका के निदेशक संजय जैन ने बताया था कि वित्तिय रूप से कमजोर होने की स्थिति में उन्होंने प्रोजेक्ट को बंद करने या किसी अन्य कंपनी को संचालन की जिम्मेदारी देने के लिए संबंधित विभागीय पदाधिकारी से अपील की थी। वे 31 जुलाई के बाद जनसंवाद केन्द्र या कोरोना नियंत्रण कक्ष का संचालन नहीं करना चाहते हैं।

कोरोना नियंत्रण कक्ष के संचालन के लिए अधिसूचना में नहीं है माइका का नाम

जनसंवाद केन्द्र को सरकार ने रातों-रात कोरोना नियंत्रण कक्ष में तो तब्दील कर दिया। लेकिन विभागीय आदेश में माइका कंपनी का कहीं जिक्र तक नहीं है। 24 मार्च 2020 को प्रकाशित विभागीय आदेश में चयनित अभ्यर्थियों कंपनी और वित्तीय उपबंध की कोई चर्चा तक नहीं की गई है।

नियोजक और नियोक्ता के बीच विवाद में क्यों उलझे सरकार

माइका अगर चाहती तो करारनामे के मुताबिक आडिट रिपोर्ट आने के बाद विभागीय निर्देश का इंतजार कर सकती थी। लेकिन पिछली गलतियों पर पर्दा डालकर वर्तमान सरकार के नजरों में अच्छा बनने के लिए कोरोना नियंत्रण कक्ष का संचालन किया। यहां सवाल यह भी उठता है कि अगर विभाग के माध्यम से कोरोना नियंत्रण कक्ष के संचालन के लिए वित्तिय प्रबंधन नहीं किए गए थे, तो फिर किस आधार पर नियंत्रण कक्ष का कार्य जारी रखा गया। इस संबंध में कर्मचारियों को कोई भी जानकारी क्यों नहीं दी गई।

चार माह का वेतन बकाया

कोरोना नियंत्रण कक्ष में कार्यरत कर्मचारियों को अप्रैल 2020 से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। हालांकि इस संबंध में संजन जैन ने जुलाई माह में कुछ वेतन की राशि देने की बात कही है। लेकिन पूर्ण राशि कब.तक मिलेगी। इसकी जानकारी किसी के पास नहीं।


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